उत्तराखंड

नैनीताल झील पर संकट घट रही गहराई से इकोसिस्टम खतरे में

nidhi
17 Sept 2026 8:57 AM IST
नैनीताल झील पर संकट घट रही गहराई से इकोसिस्टम खतरे में
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नैनीताल झील में बड़ा बदलाव

नैनीताल : उत्तराखंड की प्रसिद्ध नैनीताल झील को लेकर चिंता बढ़ गई है। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के अनुसार, झील की गहराई में लगातार कमी आने से इसके पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) पर असर पड़ सकता है। नैनी झील न केवल पर्यटन का प्रमुख केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि झील में जमा गाद, बदलते मौसम के पैटर्न और जल स्रोतों पर बढ़ते दबाव जैसे कारण इसकी स्थिति को प्रभावित कर रहे हैं।

गाद जमा होने से बढ़ी समस्या
नैनी झील में लंबे समय से गाद जमा होने की समस्या देखी जा रही है। पहाड़ी क्षेत्रों से बहकर आने वाली मिट्टी और अन्य सामग्री झील के तल में जमा होती रहती है, जिससे इसकी गहराई कम हो सकती है। झील की क्षमता कम होने से पानी के भंडारण और प्राकृतिक संतुलन पर प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है।
इकोसिस्टम पर पड़ सकता है असर
नैनी झील में कई प्रकार के जलीय जीव और वनस्पतियां पाई जाती हैं। पानी की मात्रा और गुणवत्ता में बदलाव से इनके जीवन पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, झील के संरक्षण के लिए नियमित निगरानी और वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन जरूरी है।
पर्यटन पर भी हो सकता है प्रभाव
नैनीताल की पहचान काफी हद तक नैनी झील से जुड़ी हुई है। लाखों पर्यटक हर साल झील देखने पहुंचते हैं। झील की स्थिति खराब होने से पर्यटन गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। स्थानीय लोग और पर्यावरण प्रेमी लंबे समय से झील संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग करते रहे हैं।
संरक्षण के लिए प्रयास जरूरी
झील को बचाने के लिए गाद हटाने, जल स्रोतों के संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण जैसे उपायों पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नैनी झील का संरक्षण केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों और पर्यटन क्षेत्र के लिए भी बेहद जरूरी है।

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